बुधवार, 8 जनवरी 2025

कौशल भारत का एक चेहरा


2014 में भारत सरकार ने कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय की स्थापना की। इसमें पहले से चल रहे कौशल आधारित कार्यक्रमों का समावेश करके एक नया मंत्रालय बनाया गया और 'कौशल भारत' का नारा दिया गया। सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा अनेक कार्यक्रम विभिन्न माध्यमों से शुरू किए गए ताकि देश के बेरोजगार युवाओं को कौशल आधारित शिक्षा प्रदान की जा सके और उन्हें रोजगार या उद्यमशीलता की ओर अग्रसर किया जा सके। भारत में दुनिया की सबसे अधिक काम करने वाली जनसंख्या है, जिसमें 15 से 59 वर्ष की आयु वर्ग के लोग 62% हैं और 25 वर्ष से कम आयु के लोग 54% हैं। यह जनसंख्या देश के लिए एक बड़ी संपदा है। लेकिन यदि इस कामकाजी जनसंख्या को सही दिशा नहीं मिली, तो यह निर्भरता या बोझ बन सकती है। आज का युवा वर्ग चकाचौंध भरी दुनिया में जीना चाहता है और जल्दी बड़ा आदमी बनना चाहता है। लेकिन छोटे स्तर से शुरुआत करने वाले मात्र कुछ प्रतिशत ही हैं। नशा, मानसिक दबाव, बेरोजगारी और सही समय पर सही दिशा न मिलने जैसे कारण युवाओं के भटकाव का मुख्य कारण बनते हैं।

कुशल मानव संसाधन की स्थिति

यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण से कुशल मानव संसाधन केवल 3-4% और अनौपचारिक प्रशिक्षण से 8% के करीब है। कुल मिलाकर यह आंकड़ा मात्र 11-12% तक पहुंचता है। जबकि अन्य देशों की तुलना में कोरिया में 96%, जर्मनी में 75%, जापान में 80%, इंग्लैंड में 68%, और चीन में 30% कुशल मानव संसाधन है। चीन, जो हमारा पड़ोसी देश है, मैन्युफैक्चरिंग का एक हब बन गया है। वह अन्य देशों से कच्चा माल लेकर अपने कुशल मानव संसाधनों का सही उपयोग करता है और उसे उत्पादों में बदलकर सस्ते, अच्छे और आकर्षक तरीके से दुनिया को निर्यात करता है। इससे उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और उसकी जीडीपी बढ़ती है।

यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नजर डालें तो भारत वर्तमान में 3.89 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ पांचवें स्थान पर है। अमेरिका 29.17 ट्रिलियन डॉलर के साथ पहले स्थान पर है, जबकि चीन 18.27 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। जर्मनी और जापान क्रमशः 4.71 और 4.07 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ भारत से आगे हैं। हालांकि, भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। लेकिन हमें इस दिशा में अपनी रणनीति, तकनीक और कार्य की गति को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। अपनी मैनपावर को कुशल बनाकर सही दिशा में लगाना ही हमें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने में मदद करेगा।

चुनौतियां

1. कौशल आधारित व्यवसाय या उद्यमशीलता के प्रति लोगों में इच्छाशक्ति की कमी।

2. प्रशिक्षण की गुणवत्ता बाजार की जरूरतों के अनुसार नहीं होना।

3. ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में कौशल विकास कार्यक्रमों की पहुंच का अभाव।

4. कुशल प्रशिक्षकों की कमी और उपलब्ध प्रशिक्षकों में उचित कौशल का अभाव।


सुधार के क्षेत्र

1. उद्योग आधारित प्रशिक्षण: उद्योगों की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करना।

2. शिक्षा पद्धति में सुधार: शिक्षा प्रणाली में व्यावसायिक प्रशिक्षण को शामिल करना।

3. महिलाओं का सशक्तिकरण: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाओं को उनके अनुकूल कौशल प्रदान करना ताकि वे उद्यमशीलता और उत्पाद निर्माण में सक्षम बन सकें।

4. मूलभूत सुविधाओं का विकास: प्रशिक्षण केंद्रों के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

5. कुशल प्रशिक्षकों का विकास: प्रशिक्षकों को उद्योग और बाजार की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करना।

6. नवीन कौशल विकास: नए कौशल सीखने (Skilling), पुराने कौशल को बदलने (Reskilling), और मौजूदा कौशल को उन्नत बनाने (Upskilling) पर ध्यान देना।

'कौशल भारत' केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक सशक्त अभियान है, जो देश के युवाओं को सशक्त बनाने और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका सुनिश्चित करने का प्रयास करता है। भारत को अपने मानव संसाधन की शक्ति का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए कौशल विकास के सभी पहलुओं में सुधार और विस्तार करना होगा। यही प्रयास भारत को आत्मनिर्भर और वैश्विक शक्ति बनाने में सहायक सिद्ध होगा।







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